शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

बिराऊक प्वौथ: कुमाऊनी कविता।

भौत दिनन बै इच्छा छी,

एक बिराऊक प्वौथ घर लौं।

काऊ, स्यैत या कुरबुरैल,

उ पर आपणी माया लुटौं।।


गूं- गूं मैं ढूंढ़ी आयूं,

बिराऊक प्वौथ कैं नै मिलौ।

मोबाइल में खोज करी मैंल जब,

एक स्यत विदेशी बिराऊ मिलौ।।


नीला- निल वीक आंख छन,

मखमल जस लाम बाल।

दूध- भात उ नै खांछी,

पेडिग्री छी वीक प्राण।।


कभै बौलक पाछिल त,

कभै ज्योड़क पाछिल दौड़े छी।

वीक नान- नानि हरकत देखि,

हम सब ओरी काउ हंसै छी।।


माठू- माठू हिटबेर जब ,

उ म्यर काखि मैं औछी।

नान- नानु पंजांल उ,

आपणी माया कै जतौछी।।


देखण वाल सब कौणी

कति मुलमुलौ छ य बिराऊ।

म्याऊं- म्याऊं करि नखार दिखैबेर,

घरम सबूंक लाडिल बणौ बिराऊ।।


स्वरचित- मंजू बोहरा बिष्ट,

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।