एक बस्ती में रहता था रामू का परिवार।
पत्नी शीला और बेटी रोशनी थे उसके संसार।।
शिक्षा से अनभिज्ञ थे दोनों।
मेहनत- मजदूरी करते दोनों।।
बस्ती से कुछ ही बच्चे स्कूल जाते थे।
बाकी बच्चे डोलते- फिरते और खेलते रहते थे।।
समय मिलने पर मैं अक्सर बस्ती में जाती।
बच्चों को शिक्षा का महत्व समझाती।।
संग में यौन उत्पीडन के बारे में बताती।
और बच्चियों को गुड़ टच और बैड टच का अंतर समझाती।।
उन बच्चों में रोशनी मुझे बेहद प्रिय थी।
क्योंकि उसे पढ़ने की बड़ी ललक थी।।
रोशनी हमेशा स्कूल जाते बच्चों को देखती।
काश! "मैं भी स्कूल जाती," वह अक्सर सोचती।।
शीला से रोशनी कहती!, "मां मुझे भी स्कूल जाना है।"
शीला कहती! "बेटी स्कूल जाकर क्या करना है?"
"बड़ी होकर तूने चूल्हा- चौका करना है।"
"और शादी हो जाने पर अपना घर संभालना है।।"
मां की बातें सुनकर रोशनी का मन टूटता था।
पर स्कूल जाने का सपना जिंदा रहता था।।
मजदूरी से लौटकर शाम को सभी मजदूर इकट्ठे होते।
कच्ची देशी शराब पीकर आपस में लड़ते- भिड़ते।।
पड़ोस के हामिद चाचा वक्त- बेवक्त रामू के घर आ जाते।
मीठी- मीठी बातें करके अपनापन जताते।।
कभी वो कुरकुरे लाते, कभी टॉफियां लाते।
और रोशनी से ढ़ेर सारा लाड़- लड़ाते।।
एक दिन रोशनी घर में अकेली खेल रही थी।
दुनिया से वो बिल्कुल ही बेखबर थी।।
रोजाना की भांति हामिद चाचा आ गये।
रोशनी को अकेली देख कुकृत्य के कीड़े कुलबुला गये।।
बोले! चलो रोशनी बेटा आइसक्रीम खिलाऊं।
संग में एक चटपटा कुरकरा दिलाऊं।।
छुपा हुआ था धोखा उसकी बातों में।
विकृत मानसिकता छुपाई थी शांत चेहरे में।।
आइसक्रीम- कुरकुरे दिलाकर रोशनी को वह घर ले गया।
गोद में बैठाकर रोशनी का सिर सहलाने लगा।।
ज्यों ही अपने गंदे हाथों से अन्य अंगों को छूने लगा।
उसकी इस हरकत से रोशनी को असहज महसूस होने लगा।।
रोशनी को झट से आंटी जी की बात याद आ गई।
हामिद चाचा की हरकतें गंदी हैं यह बात उसके समझ में आ गई।।
“कोई भी छुए अगर गलत तरीके से।
तो मना करना है, दूर रहना हर हाल में।।”
तभी “अंकल छोड़ो मुझे” रोशनी चिल्लाई।
मम्मी- पापा बचाओ उसने जोर से आवाज लगाई।।
सुन रोशनी की आवाज पास- पड़ोसी दौड़ कर आए।
हामिद चाचा की हरकत देख कर सभी लोग स्तब्ध हुए।।
रोशनी ने रो- रोकर सारा हाल बताया।
पड़ोसियों ने पुलिस बुलाकर हामिद को अरेस्ट कराया।।
सुनी खबर रामू- शीला बेतहाशा दौड़े।
प्रभु कोई अनहोनी ना हो, प्रभु को हाथ जोड़े।।
रोशनी को देखते ही शीला ने अपने सीने से चिपका लिया।
सकुशल देख बिटिया को रामू ने भगवान का धन्यवाद किया।।
रोशनी ने रामू- शीला को हामिद की सारी करतूत बताई।
आंटी जी की बात याद आने पर खुद को कैसे बचाया बात दोहराई।।
रामू- शीला शिक्षा का महत्व समझ गये।
तुरंत रोशनी को स्कूल में दाखिला के लिए ले गए।।
रोशनी गई स्कूल के द्वार।
खुल गया ज्ञान का सुंदर संसार।।
स्वरचित: मंजू बोहरा बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश