मुखड़ा मैंस- ओ मेरी.. ओर म्येरी होंसिया बाना, कब तू सुणेली
मुड़ माथ में घाम चड़ी गो, कब तू उठेली।।
मुखड़ा सैंणी- मोहना बाज्यू घर कै आपण, तुमी संभाला।।
नी करो होइ कचकचा, सासु- सौर सुणला।
१अंतरा: मैंस- चुल भिनेर जगै हालि, भ्यार- भीतेर झाड़ि हालि।
नवाई- धवाई द्यापतनों कै, पुज पाठ लै करि हालि।।
उठ मेरी...उठ म्येरी होंसिया बाना, चाहा बणाली।
मुड़ माथ में घाम चड़ी गो, कब तू सुणैली।।
२- अंतरा: सैंणी- हाय खर्राटा, त्यर खर्राटा, सिति मा त्यर मड़मडाटा।
बैठि- बैठि काट दीछ, मैं ल बेली सारि राता।।
यों नीन क मोहना बाज्यू , तुम छा कारणा।
नी करो होइ कचकचा, सास- सौर सुणला।।
३- अंतरा: मैंस- गोरू बछा कै दौंणी भ्यार, मैं ल सुवा बांधि हालि।
घास- पात गोरू बछा कै, मेरी सुवा द्यी हालि।।
उठ मेरी.. उठ मेरी नारिंगे दांणी, मोऊ खड़ेली।
मुड़ माथ में घाम चड़ी गो, कब तू उठैली।।
४- अंतरा: सैंणी- पी खैबेर रात भरि, तुम नाचण है रौंछा।
सिति बटि लै हाई राम, भरभराट मचौं छा।।
सुधर जावा मोहना बाज्यू, नी पियो शराबा।
यौ शराब ल म्येरी ज्यूनि, करि है खराबा।।
५: अंतरा- मैस- सांची सुवा ब्याखुलि बै, नी प्यों ल मैं शराबा।
तेरी कसमा सारि बोतला, घुरै ओंला दूर भ्योवा।।
उठ.. उठ म्येरी पुन्यू की ज्यूना, कल्यौ बणूं लौ।
भल- भलो भ्यार घाम ऐरो, दगड़ा खौं लौ।।
स्वरचित: मंजू बोहरा बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।