बहुत दिनों से थी तमन्ना,
एक नन्ही बिल्ली घर लाऊं।
काली, धवल या चितकबरी,
जी भर उस पर प्यार लुटाऊं।।
गांव- गांव में ढूंढ़ा मैंने,
नन्ही बिल्ली नहीं मिली।
मोबाइल पर जब खोजा मैंने,
तब एक पर्शियन बिल्ली मिली।।
नीली- नीली उसकी आंखें,
मखमल जैसे कोमल बाल।
राजकुमारी जैसी लगती,
उसकी प्यारी मतवाली चाल।।
रोटी- दूध उसे न भाता,
पेडिग्री ही उसे सुहाती।
अपने प्यारे नन्हे घर में,
रानी बनकर वह इठलाती।।
कभी गेंद के पीछे दौड़े,
कभी परछाईं से टकराए।
उसकी शैतानी देख- देख कर,
सबके चेहरे पर मुस्काए।।
धीरे- धीरे कदम बढ़ाकर,
वह मेरी गोदी में आती।
नन्हे- नन्हे कोमल पंजों से,
मन का सारा प्यार जताती।।
म्याऊं- म्याऊं करती जब आती,
घर में खुशियां नई जगाती।
उसकी नन्ही- सी अठखेलियां,
सबके मन को खूब लुभाती।।
स्वरचित- मं
जू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।