गंगा दशहरा (दश्यार) जेठक महैण शुक्ल पक्ष दशमी दिन मणै जांछ। दश्यार पर्व मां गंगा नदीक धरती में औणक दिनक रूप में मणै जांछ। हमरि पहाड़ेकि सांस्कृतिक विरासतों में दश्यार कै पारंपरिक पर्वक रूप मणौनी, पहाड़ में आजक दिन देली लिपण, ऐपण दिण और पुरोहित द्वारा यजमान कै दश्यार पत्र दी बेर दक्षिणा ल्यी कृतार्थ हुनेकि परम्परा प्रचलित छौ, पैलि दिनों में पंडित ज्यू खुद आपणी हाथोंल चित्र उकेर बेर दिन- रात एक कर बेर दश्यार बणौंछी, और आपण हर यजमानक धेलिम जै बेर शुभ आशीष दीछी, आज टैम बदल गौ, बाजार में रेडीमेड दश्यार मिलणईं, लेकिन श्रद्धा भाव आज लै उई छौ, जो बरसों पैली छी।
गौंफन त आज लै पुराण रीति- रिवाजल दश्यार मणौनी, आजक दिन तीर्थो में नहानैल और दानैल कई गुना सकर पुण्य मिलौं।
आवो हम सब व्हाट्सएपक जरियल एक मुच्छाव जगौणूं दश्यारक यौ पावन पर्व कै धूमधामल मणौंनू। एक बार फिर आपूं सबूं कै दश्यार त्यारकि भौत- भौत बधै।🙏🙏💐💐😊😊