अलग-अलग पौधे लाकर, मैंने एक बागान बनाया प्यारा।
अपनी मेहनत और लगन से, सींचा, पाला- पोसा न्यारा।।
कुछ ही समय में रंग-बिरंगे फूलों से,
मेरा बागान सजा था।
किसी फूल की खुशबू मन मोहक थी,
तो कोई फूल मन मोह रहा था।।
कुछ पौधे कटीले थे, पर सारे कटीले फूल, बेहद खूबसूरत थे।।
बागान में फूलों की खूबसूरती, सभी को करती थी आकर्षित।
जिसे देख बागान, स्वयं भी होता था हर्षित।।
स्वरचित: मंजू बोहरा बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।