Wednesday, 4 February 2026

म्येरी बाना: कुमाऊनी गीत ।

 मुखड़ा मैंस- ओ मेरी.. ओर म्येरी होंसिया बाना, कब तू सुणेली 

मुड़ माथ में घाम चड़ी गो, कब तू उठेली।।


मुखड़ा सैंणी- मोहना बाज्यू घर कै आपण, तुमी संभाला।।

नी करो होइ कचकचा, सासु- सौर सुणला।


१अंतरा: मैंस- चुल भिनेर जगै हालि, भ्यार- भीतेर झाड़ि हालि।

नवाई- धवाई द्यापतनों कै, पुज पाठ लै करि हालि।।

उठ मेरी...उठ म्येरी होंसिया बाना, चाहा बणाली।

मुड़ माथ में घाम चड़ी गो, कब तू सुणैली।।


२- अंतरा: सैंणी- हाय खर्राटा, त्यर खर्राटा, सिति मा त्यर मड़मडाटा।

बैठि- बैठि काट दीछ, मैं ल बेली सारि राता।।

यों नीन क मोहना बाज्यू , तुम छा कारणा।

नी करो होइ कचकचा, सास- सौर सुणला।।


३- अंतरा: मैंस- गोरू बछा कै दौंणी भ्यार, मैं ल सुवा बांधि हालि।

घास- पात गोरू बछा कै, मेरी सुवा द्यी हालि।।

उठ मेरी.. उठ मेरी नारिंगे दांणी, मोऊ खड़ेली।

मुड़ माथ में घाम चड़ी गो, कब तू उठैली।।


४- अंतरा: सैंणी- पी खैबेर रात भरि, तुम नाचण है रौंछा।

सिति बटि लै हाई राम, भरभराट मचौं छा।।

सुधर जावा मोहना बाज्यू, नी पियो शराबा‌।

यौ शराब ल म्येरी ज्यूनि, करि है खराबा।।


५: अंतरा- मैस- सांची सुवा ब्याखुलि बै, नी प्यों ल मैं शराबा। 

तेरी कसमा सारि बोतला, घुरै ओंला दूर भ्योवा।।

उठ.. उठ म्येरी पुन्यू की ज्यूना, कल्यौ बणूं लौ।

भल- भलो भ्यार घाम ऐरो, दगड़ा खौं लौ।।


स्वरचित: मंजू बोहरा बिष्ट, 

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।