Tuesday, 10 February 2026

बाग: कविता। - 35

 बागान बनाना आसान नहीं होता,

रंग-बिरंगे फूलों का संगम लाना पड़ता है।

पल्लवित करने में है जद्दोजहद करनी,

हर कदम पर झंझावातों का सामना करना पड़ता है।।


लेकिन जब फूल खिलते हैं बागान में,

सारे झंझावात भूल जाता है माली।

हर पौधे की अपनी है एक कहानी सुहानी,

कोई पौधा सेवा मांगे, कोई पौधा खुश होता देख हवा- पानी।।


स्वरचित: मंजू बोहरा बिष्ट,

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।