Saturday, 24 January 2026

मैया: कुमाऊनी कविता।

 मुखड़ा- ऊंच- नीचा डांड्यू कै करी पार।

ओ मैया, ऐ गयूं त्यर द्वार मा।।

दर्शन दी जा वे इक बार।

ओ मैया, ऐजा वे बैठि शेर मा।।


कोरस- बैठि शेर मा, बैठि शेर मा,बैठि शेर मा, बैठि शेर मा 

ऐजा वे ऐजा एक बार ओ मैया ऐ जा वे बैठि शेर मा।।

शेर मा।।


अंतरा1- दूर- दूरां बै मैया भक्ता ऐ रैयीं,

कोई झांवरी, कोई बिछ्छू ल्यै रैयीं,

झांवरी पैरेली मैया आज। ओ मैया ऐ जा वे बैठी शेर मा,

बिछछू पैरैली मैया आज, ओ मैया ऐ जा वै बैठी शेर मा।


अंतरा2- दूर- दूरां बै मैया भक्ता ऐ रैयीं,

कोई लंहगा, कोई साड़ी ल्यै रैयीं,

चुन्नी ओडूंल मैया आज, ओ मैया ऐ जा वे बैठी शेर मा।


अंतरा3 - दूर- दूरां बै मैया भक्ता ऐ रैयीं,

कोई मैहदी, कोई चूड़ी ल्यै रैयीं,

मेहंदी रचा ली मैया आज, ओ मैया ऐ जा वे बैठी शेर मा,

चूड़ी पैरेली मैया आज ओ मैया ऐ जा वे बैठी शेर मा।



अंतरा4- दूर- दूरां बै मैया भक्ता ऐ रैयीं,

गउ क हरूवा, कोई नथुलि ल्यै रैयीं,

हार पैरेली मैया आज ओ मैया ऐ जा वे बैठी शेर मा,

नथुलि पैरैली मैया आज ओ मैया ऐ जा वे बैठी शेर मा।


अंतरा5- दूर- दूरां बै मैया भक्ता ऐ रैयीं,

कोई टिकुलि कोई बिंदुलि ल्यै रैयीं,

बिदुलि सजालि मां कपाल, ओ मैया ऐ जा वे बैठी शेर मा,

टिकुलि लगानी ख्वर माथ, ओ मैया ऐ जा वे बैठी शेर मा।


स्वरचित- मंजू बोहरा बिष्ट।

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।

मूल निवासी- हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखंड।