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शिवसाधना क्षणिका।

देख जटा में गंगा की धार,

गले में लिपटा नागों का हार।

तेरी इसी छवि पर भोले,

मैं हुई बलिहार ।।


स्वरचित: मंजू बोहरा बिष्ट।

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश ‌

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