Monday, 1 February 2021

दोहा: मेरे सांवरे 8

१- गोपी ललिता रूप में, चली लिए गोपाल।

दूध पिलाने लगी ज्यों, रूप बना विकराल।।


२- कजरारे से नैन हैं, मन मोहिनी सूरत।

मेरे हृदय बैठ गई, तेरी श्याम मूरत।।


३- तारण हार बने कृष्णा, मीरा, गोपी, ग्वाल।

मेरा भी तारण करो, गिरधारी गोपाल।।


स्वरचित: मंजू बिष्ट,

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।