Saturday, 30 January 2021

दोहा: मेरे सांवरे ७

१- पाप धरा में ज्यों बढ़े, हरि लेते अवतार।

रूप धरा घनश्याम का, कंस किया संहार।।


२- रखे कृष्ण टोकरी में, चले नंद के गॉव। 

 राह दिये यमुना नदी, ज्यों ही छूए पॉव।।


३-बस इतनी सी चाह है, जपूं श्याम का नाम।

रूह तजे जब देह को, मिले कृष्ण का धाम।।


स्वरचित मंजू बिष्ट,

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।