Sunday, 17 January 2021

दोहा: इंद्र धनुष


१- सात सुरों में बज रहा, मधुर सरस संगीत।

बसंत ऋतु आया सखी, मिलकर गाएं गीत।।


२- सात लड़ी में मंजु सी, लगे मोतियन हार। 

निखरा रूप दुल्हन का, किया साज- श्रृंगार।।


३- सतरंगी जीवन हुआ, आईं खुशियां द्वार।

बाहों में भर लूं तुझे, मौसम मस्त बहार।।


४- श्रावण में  मेघा करे, मद्धिम- तेज फुहार।

इंद्र चाप दिखे गगन में, खुशियां मिले अपार।।

स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।