१- सात सुरों में बज रहा, मधुर सरस संगीत।
बसंत ऋतु आया सखी, मिलकर गाएं गीत।।
२- सात लड़ी में मंजु सी, लगे मोतियन हार।
निखरा रूप दुल्हन का, किया साज- श्रृंगार।।
३- सतरंगी जीवन हुआ, आईं खुशियां द्वार।
बाहों में भर लूं तुझे, मौसम मस्त बहार।।
४- श्रावण में मेघा करे, मद्धिम- तेज फुहार।
इंद्र चाप दिखे गगन में, खुशियां मिले अपार।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।