Monday, 18 January 2021

दोहा: सांवली सलोनी सूरत

 १- श्याम- सलोना रूप हो, मीठे-मीठे बोल। 

सौम्य सीरत प्राण में, दे देवान्न घोल ।।


२- श्याम- सलोनी रूपसी, बड़े-बड़े से नैन।

अधर गुलाबी पंखुड़ी, लूटे मेरा चैन।।


३- गौर वर्ण चाहा नहीं, ना रंभा सी कांति।

श्यामल सौम्या रुप हो, और सदन में शांति।।


४- गागर लिए संग सखी, सजनी आना घाट।

पल-पल घड़ियां गिन रहा, जोह रहा हूं बाट।।


स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।