१- श्याम- सलोना रूप हो, मीठे-मीठे बोल।
सौम्य सीरत प्राण में, दे देवान्न घोल ।।
२- श्याम- सलोनी रूपसी, बड़े-बड़े से नैन।
अधर गुलाबी पंखुड़ी, लूटे मेरा चैन।।
३- गौर वर्ण चाहा नहीं, ना रंभा सी कांति।
श्यामल सौम्या रुप हो, और सदन में शांति।।
४- गागर लिए संग सखी, सजनी आना घाट।
पल-पल घड़ियां गिन रहा, जोह रहा हूं बाट।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।