१- हरदम रटते जो रहें, राधे-राधे नाम।
पल भर में उसके बनें, सारे बिगड़े काम।।
२- भाद्र मास तिथि अष्टमी, हुईं खूब बरसात।
द्वारपाल सब सो रहे, प्रगटे हरि साक्षात।।
३- जन्म लियो हरि देवकी, रूप धरा गोपाल।
मुदित हुए वसु- देवकी, चूमे बालक भाल।।
स्वरचित मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।