Friday, 29 January 2021

दोहा: मेरे सांवरे ६


१- हरदम रटते जो रहें, राधे-राधे नाम।

पल भर में उसके बनें, सारे बिगड़े काम।।


२- भाद्र मास तिथि अष्टमी, हुईं खूब बरसात।

द्वारपाल सब सो रहे, प्रगटे हरि साक्षात।।


३- जन्म लियो हरि देवकी, रूप धरा गोपाल।

मुदित हुए वसु- देवकी, चूमे बालक भाल।।


स्वरचित मंजू बिष्ट,

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।