Monday, 25 January 2021

दोहा: मेरे सांवरे ४

 १- तारण- हारी मोहना, मीरा, गोपी, ग्वाल।

मेरा भी तारण करो, अब गिरिधर गोपाल।।


२- सुन मुरली की धुन को, दौड़ी जमुना तीर।

तेरे दरश नैना तरसे, उर में जागी पीर।।


३- जमुना के तट पर कृष्ण, गैया रहे चराय।

मंद-मंद मुसकाय के, वंशी रहे बजाय।।


४- मटकी फोड़ी कृष्ण ने, मुख माखन लिपटाय।

पूछ रही मां यशोदा, मुख मासूम बनाय।।


स्वरचित: मंजू बिष्ट,

गाजियाबाद उत्तर प्रदेश।