Sunday, 24 January 2021

दोहा: मेरे सांवरे ३

१- लगन लगी धनश्याम से, रोज करूं इजहार। 

बस उत्कंठा दर्शन की, करती हूं इकरार।।


२-सुन मुरली की तान को, दौड़ी जमुना तीर। 

श्याम संग थी गोपियां, हुई हृदय क्यों पीर।।


३- सुन द्रोपदी पुकार को, बढ़ा दिए तुम चीर।  

गिरधारी अब तो हरौ, मेरे मन की पीर।।


स्वरचित: मंजू बिष्ट

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।