१- लगन लगी धनश्याम से, रोज करूं इजहार।
बस उत्कंठा दर्शन की, करती हूं इकरार।।
२-सुन मुरली की तान को, दौड़ी जमुना तीर।
श्याम संग थी गोपियां, हुई हृदय क्यों पीर।।
३- सुन द्रोपदी पुकार को, बढ़ा दिए तुम चीर।
गिरधारी अब तो हरौ, मेरे मन की पीर।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।