१- श्याम सलोने कृष्ण से, लागी मुझको प्रीत।
खाएं सौगंध गोपियां, कान्हा मेरा मीत।।
२- राधा गागर संग ले, आई जमुना तीर।
बंशी की धुन सुनी तो, राधा हुई अधीर।।
३- अपनी धुन में बांवरी, किसको ढूंढें रोज।
कृष्ण बसे तेरे हृदय, मीरा बनके खोज।।
४- यमुना के तट पर श्याम, छेड़े मीठी तान।
रास रचे लीला करे, लेकर अधर मुस्कान।।
५- ब्रज रज बन जाऊं सखी, ब्रज की धरा महान।
महिमा अमित ब्रजेश की, ब्रज ही त्रिदिव समान ।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।