Tuesday, 19 January 2021

दोहा: मेरे सांवरे १

 १- श्याम सलोने कृष्ण से, लागी मुझको प्रीत।

खाएं सौगंध गोपियां, कान्हा मेरा मीत।।


२-  राधा गागर संग ले, आई जमुना तीर।

    बंशी की धुन सुनी तो, राधा हुई अधीर।।


३-  अपनी धुन में बांवरी, किसको ढूंढें रोज। 

कृष्ण बसे तेरे हृदय, मीरा बनके खोज।।


४- यमुना के तट पर श्याम,  छेड़े मीठी तान।

रास रचे लीला करे, लेकर अधर मुस्कान।।


५- ब्रज रज बन जाऊं सखी, ब्रज की धरा महान।

महिमा अमित ब्रजेश की, ब्रज ही त्रिदिव समान ।।


स्वरचित: मंजू बिष्ट, 

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।