Tuesday, 19 January 2021

दोहा: मन बावरा

१- चौमासा के श्याम घन, पावस मधुर फुहार।

देख पिया हर्षित हुई, जीवन मस्त बहार।।


२- मन में गर तुफ़ान उठे, हुआ देह भी क्लांत।

चुनना मोती ज्ञान का, वाणी सुनना संत।।


३- डी पी की छवि देख के, जो मन को भटकाय।

जब होता है सामना, देख बड़ा पछताय।।


४- भूत-प्रेत देखें नहीं, करती ना परिहास।

राग-द्वेष या वासना, मानव बने पिचाश।।


स्वरचित: मंजू बिष्ट,

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।