१- चौमासा के श्याम घन, पावस मधुर फुहार।
देख पिया हर्षित हुई, जीवन मस्त बहार।।
२- मन में गर तुफ़ान उठे, हुआ देह भी क्लांत।
चुनना मोती ज्ञान का, वाणी सुनना संत।।
३- डी पी की छवि देख के, जो मन को भटकाय।
जब होता है सामना, देख बड़ा पछताय।।
४- भूत-प्रेत देखें नहीं, करती ना परिहास।
राग-द्वेष या वासना, मानव बने पिचाश।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।