१- जल चढ़ाएं दिनकर को, नियम पूर्वक भोर।
यश उसका बढ़ जाएगा, चहुं दिशाओं ओर।।
२- शैल शैल में हिमवर्षा, शीतलहर मैदान।
धुंध और ठिठुरन बड़ा, जन जीवन हैरान।।
३- जलसा है लोहड़ी का, छाईं खूब उमंग।
गजक, रेवड़ी खा रहे, बाजे ढोल मृदंग ।।
४- विप्र, दीन को दान दें, आज दिवस संक्रांति।
प्रमोद उपजे हृदय में, मिलती ऊर्जा शांति।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट।
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।