Monday, 13 July 2020

दोहा: सावन

१- हरी हरी सी चूड़ियां, किया हरा सिंगार।

   देख पिया हर्षित भई, उर में जागे प्यार।।


२- सावन के महीने में, धूप लगे है तेज।

    रिमझिम बरखा हो रही, खेत भए लबरेज।।


३- रिमझिम बरखा देख के, मनवा गाए गीत।

नैना तुझको ढूंढते, दिल में जागी प्रीत।।


४- सावन आया झूम के, खूब हुई बरसात।

घुमड़- घुमड़ अंबुद घिरे, हुईं स्याह सी रात।।


५- सावन के महीने में, मेघ मचाए शोर।

रिमझिम फुहार देख के, वन में नाचे मोर।।


६- सावन आएं झूम के, ठंडी चली बयार।

  कृषक हृदय हर्षित भए, खेत हुए गुलजार।।


७- रिमझिम बरखा देख के, करें हसरतें शोर।

 मेरा तन पुलकित हुआ, मन में उठे हिलोर।।


८- चौमासा के श्याम घन, पावस मधुर फुहार।

आय पिया हर्षित भई, जीवन मस्त बहार।।


स्वरचित: मंजू बिष्ट,

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।