१- हरी हरी सी चूड़ियां, किया हरा सिंगार।
देख पिया हर्षित भई, उर में जागे प्यार।।
२- सावन के महीने में, धूप लगे है तेज।
रिमझिम बरखा हो रही, खेत भए लबरेज।।
३- रिमझिम बरखा देख के, मनवा गाए गीत।
नैना तुझको ढूंढते, दिल में जागी प्रीत।।
४- सावन आया झूम के, खूब हुई बरसात।
घुमड़- घुमड़ अंबुद घिरे, हुईं स्याह सी रात।।
५- सावन के महीने में, मेघ मचाए शोर।
रिमझिम फुहार देख के, वन में नाचे मोर।।
६- सावन आएं झूम के, ठंडी चली बयार।
कृषक हृदय हर्षित भए, खेत हुए गुलजार।।
७- रिमझिम बरखा देख के, करें हसरतें शोर।
मेरा तन पुलकित हुआ, मन में उठे हिलोर।।
८- चौमासा के श्याम घन, पावस मधुर फुहार।
आय पिया हर्षित भई, जीवन मस्त बहार।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।