Saturday, 11 July 2020

दोहा: खामोशी

१- तनहा मुझको छोड़के, सजन गए क्यों भूल।

कटती ना बैरी निशा, फूल लगे हैं शूल।।


२- सजना तेरी प्रीत में, जीवन मस्त बहार।

छोटी सी तकरार में, कैसी पड़ी दरार।।


३- आओगे तुम लौट के, बैठी हूं इस आस।

राह तके अक्षि विलापे,  मनवा भए उदास।।


स्वरचित :मंजू बिष्ट,

गाजियाबाद उत्तर प्रदेश।