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तुम बिन पिया मोरे,
हिय नहीं लगता है,
कैसे बतलाऊं तुझे।
जिया घबरात है।।
तुझमें समाती पिया,
दिल की ये धड़कन,
छोड़कर जाएं मुझे।
जिया ये डरत है।।
माथे की है बिंदी सुनी,
कजराई नैना सुनी,
होंठों की ये लाली पिया।
मुझको खिजात है।।
सात फेरे लेके हम,
बंधे एक डोरी से हैं,
जहां जाए संग चलूं।
मांगी ये मन्नत है।।
बातें तेरी याद करूं,
मुझे ऐसा लगता है,
तपती हुई रेत में।
तू ठंडी बयार है।।
ठंडी चली पुरवाई,
बदिरा भी घिर आई,
रिमझिम बारिश की।
आई ये फुहार है।।
बरसों से मोरे पिया,
बाट तेरी जोह रही,
आयेंगे वो एक दिन।
जगाई उम्मीद है।।
हिय नहीं लगता है,
कैसे बतलाऊं तुझे।
जिया घबरात है।।
तुझमें समाती पिया,
दिल की ये धड़कन,
छोड़कर जाएं मुझे।
जिया ये डरत है।।
माथे की है बिंदी सुनी,
कजराई नैना सुनी,
होंठों की ये लाली पिया।
मुझको खिजात है।।
सात फेरे लेके हम,
बंधे एक डोरी से हैं,
जहां जाए संग चलूं।
मांगी ये मन्नत है।।
बातें तेरी याद करूं,
मुझे ऐसा लगता है,
तपती हुई रेत में।
तू ठंडी बयार है।।
ठंडी चली पुरवाई,
बदिरा भी घिर आई,
रिमझिम बारिश की।
आई ये फुहार है।।
बरसों से मोरे पिया,
बाट तेरी जोह रही,
आयेंगे वो एक दिन।
जगाई उम्मीद है।।
पिया तेरे संग रहूं,
और ना मैं कुछ चाहूं,
मेरी सूनी दुनिया में।
तेरा इंतज़ार है।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।