Wednesday, 10 June 2020

दोहा: गुरु

१- गुरुवर के आशीष से, हो अज्ञान का नाश।
ज्योति जगा के ज्ञान की, जग में करे प्रकाश।।

२- शरण जाय गुरु देव की, पावे मानस ज्ञान।
काहे समय गवां रहा, तज रे तू अभिमान।।

३- अर्जित कर गुरु ज्ञान को, जन का करो कल्याण।
दीप जलाकर ज्ञान का, जग में बनो महान।।

4- संग रहे मां शारदा, कृपा करें जगदीश।
गुरुवर के आशीष से, मंजु बने वागीश।।

स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।