Sunday, 21 June 2020

दोहा: बाबा

१- मात- पिता के संग में, लगे धूप भी छांव।

     आलय आंगन चहकता, जब रहते थे गांव।।


२- आंधी से डरते नहीं, करते देखा काज।

    तुम हो मेरी प्रेरणा, तुमसे सगरे काज।।


३- जीना सीखा समर में, सीखा बनना धीर।

    बाबा के पग चिन्ह चल, बना सिपाही वीर।।


४- निशि दिन खोजत फिरू मैं, करता करुण क्रंदन। 

    टिम-टिम आभा बिखेरे, बने सितारा गगन।।


स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।