Wednesday, 6 May 2020

कविता: विद्यालय की याद।- 6

मार्च-अप्रैल बीत गया मां,
मैं विद्यालय में कब जाऊंगा।
याद आ रहे, हैं चुन्नू- मुन्नू,
कब मैं पढ़ने जाऊंगा।।

देखो ना, मेरा प्यारा बस्ता,
हर रोज मुझसे पूछता है।
कापी- किताब, रबर-पेंसिल को,
कब सहेजकर रखना है।।

अलमारी में रखी ड्रेस भी,
कान में मेरे कहती है।
पड़ी-पड़ी अलमारी में,
मुझे घुटन सी होती है।।

जूते- मोजे पड़े- पड़े,
वो भी देखो उदास पड़े हैं।
जब मैं खेलूं घर के अंदर,
मुझको आवाज लगाते हैं।।

मई- जून में प्यारी मां,
छुट्टियां शुरू हो जाएंगी।
अब तुम ही बताओ जरा मुझे,
कब विद्यालय जाना है।।

बेटे की बातों को सुनकर,
मां ने गोदी में उठा लिया।
स्नेहिल भाव से माथा चूमकर,
उसने बेटे को समझाया।।

कुछ समय की बात है लाड़ले,
यह समय भी कट जायेगा।।
तुम सब विद्यालय जाओगे,
वह समयलौटकर आयेगा।।

स्वरचित: मंजू बिष्ट;
गाजियाबाद;
उत्तर प्रदेश।