मैं हूँ तेरी बेटी;
मैं तेरी पहचान हूँ।
एक बार जन्म लेने दो;
मैं तेरे जिगर का टुकड़ा हूँ।।
तुझमें समाती है मां;
सभी देवों की शक्ति।
कवच- कुंडल बनती मेरा;
तो मैं जन्म ले लेती।।
अपनी मातृ छाया में;
मुझे जन्म लेने दो।
मैं तेरा ही अंशः हूं;
मेरा अस्तित्व महसूस करो।।
नन्हें- नन्हें मेरे हाथ हैं;
और नन्हें सेे पैर हैं।
तोतली सी बोली मेरी;
और चंचल से नैन हैं।।
भोली-भाली प्यारी सूरत;
जब देखोगी तुम मेरा।
घर खुशियों से भर जायेगा;
और चहकेगा आंगन तेरा।।
लाड़ली बेटी बनकर;
मैं तेरी गोद सजाऊंगी।
बड़ी होकर एक दिन मां;
मैं तेरी सखी बन जाऊंगी।।
पढ़-लिख कर मैं भी;
ऊंची उड़ान भरूंगी।
वादा तुमसे करती हूँ,
मैं तेरा मान बड़ाऊंगी।।
मैं तेरी पहचान हूँ।
एक बार जन्म लेने दो;
मैं तेरे जिगर का टुकड़ा हूँ।।
तुझमें समाती है मां;
सभी देवों की शक्ति।
कवच- कुंडल बनती मेरा;
तो मैं जन्म ले लेती।।
अपनी मातृ छाया में;
मुझे जन्म लेने दो।
मैं तेरा ही अंशः हूं;
मेरा अस्तित्व महसूस करो।।
नन्हें- नन्हें मेरे हाथ हैं;
और नन्हें सेे पैर हैं।
तोतली सी बोली मेरी;
और चंचल से नैन हैं।।
भोली-भाली प्यारी सूरत;
जब देखोगी तुम मेरा।
घर खुशियों से भर जायेगा;
और चहकेगा आंगन तेरा।।
लाड़ली बेटी बनकर;
मैं तेरी गोद सजाऊंगी।
बड़ी होकर एक दिन मां;
मैं तेरी सखी बन जाऊंगी।।
पढ़-लिख कर मैं भी;
ऊंची उड़ान भरूंगी।
वादा तुमसे करती हूँ,
मैं तेरा मान बड़ाऊंगी।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट;
गाजियाबाद; उत्तर प्रदेश।