Sunday, 3 May 2020

कविता: मातृभूमि- 4

शत्- शत् नमन ऐ भारतभूमि;
मैं तेरा वीर जवान हूँ।
मातृ भूमि से प्यार मुझे है;
मातृ भूमि पर कुर्बान हूं।।

मेरे देश का लहराता तिरंगा;
मेरी आन और शान है।
मातृभूमि की रक्षा करना;
ही मेरी पहचान है।।

रंग केसरिया झंडे का;
देश प्रेम की ज्योति जगाए।
सफेद रंग सदा मुझे,
अमन चैन का पाठ पढ़ाए।।

हरा रंग खुशहाली देकर,
मेरे देश को संपन्न करे।
देश के तिरंगे का सशक्त चक्र,
धर्म और कर्तव्य का पाठ सिखाएं।।


मेरा जीवन ऐ मातृभूमि;
तेरी ही अमानत है।
मातृभूमि पर कुर्बान होना;
बस इतनी सी चाहत है।।

स्वरचित: मंजू बिष्ट, गाजियाबाद,
उत्तर प्रदेश।