Tuesday, 26 May 2020

सरस्वती बंदना, विधा: मनहरण घनाक्षरी 11

मात्रा: ८, ८, ८, ७

माँ अरज सुनो मेरी, 
जीवन का तम हरो,
मैं निर्धन अज्ञानी हूँ,
विद्यारूपी ज्ञान दो, 

झोली फैलाए मैं खड़ी।
ज्ञान के चक्षु खोल दो, 
हर्षित बेला हो जाए,
मां ये वरदान दो, 

ज्ञान दायिनी शारदे।
अज्ञान तम हरती, 
मैं बालक अज्ञानी हूँ,
ज्ञान का प्रकाश दो, 

वीणा वादिनी शारदे, 
हंस है तेरी सवारी,
वीणा बजाती आओ मां, 
मेरी लाज रक्ख दो।

शारदे तेरी कृपा से,
जड़ से प्रभा बनी हूं,
ज्ञान के गीत गाऊँ मैं,
मुझे ये आशीष दो।

स्वरचित: मंजू बिष्ट, 
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश