Monday, 25 May 2020

दोहा: कोरोना संकट

१- मानव रचित विषाणु है, या कुदरत की मार।
कोरोना का रूप धर, करियो नर संहार।।

२- संकट के माहौल में, डटकर करते काम।
कोरोना वीरों तुम्हें, मेरा कोटि प्रणाम।।

३- कोरोना की मार से, श्रमिक लाचार होय।
ठलुआ से बुभुक्षा बढ़ी , गांव पलायन होय।।

४- नश्वर है काया सखी, काहे का अभिमान।
हयात मेला क्षणिक सा, माटी है परिणाम।।

स्वरचित मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।