Saturday, 23 May 2020

कविता: भारत फिर मुस्कुरायेगा कोरोना हारेगा। 9

कुछ सहमी सी, कुछ डरी- डरी सी;
है आज हमारी जिंदगी।
हर शख्स यहां खौफजदा है;
थम सी गई है जिंदगी।।

देख रौद्र रूप महामारी का;
मानव थर-थर कांप रहा है।
भ्रम टूटा दौलत- शोहरत का;
वो जीवन का मूल्य समझ गया है।।

शायद रूठी है प्रकृति;
या तुम रूठे दयानिधि!
मानव के अत्याचारों का;
मानव दुःख भोग रहा, करुणा निधि!!

संकल्प लेते हैं, आओ सभी;
ना करेंगे धरा, खिलवाड़ कभी।
पर्वत, नदियां और वनों की;
रक्षा करेंगेे हम मां प्रकृति।।

पर्यावरण की शुद्धता;
जीवन का ध्येय बनाएंगे।
स्वच्छ रखेंगेे भारत को;
"स्वच्छता" अभियान बनाएंगे।।

जन- मानस की सेवा को
अपना कर्त्तव्य बनाएंगे।
मास्क और सामाजिक दूरी;
हम जीवन में अपनाएंगे।।

योग और शाकाहारी अपनाकर;
हम स्वयं को स्वस्थ रखेंगे।
अदृश्य कोरोनावायरस;
हम तुमसे हार नहीं मानेंगे।।

धैर्य और संयम शक्ति का;
हर नागरिक पालन करेंगे।
कोरोना योद्धा की सेना;
कोरोना, तेरा संहार करेंगे।।

फिर मुस्कुरायेगा मेरा भारत;
यह स्वप्न हम देख चुके हैं।
कोरोनावायरस तू हारेगा;
यह दृढ़ संकल्प हम ले चुके हैंं।।

स्वरचित: मंजू बिष्ट;
गाजियाबाद; उत्तर प्रदेश।