Friday, 15 May 2020

गीत: जरा हौले से चल रही बयरिया

जरा हौले से चल री बयरिया;
आ जा तुझको बताऊं एक राज वे!
आने वाले हैं मोरे सांवरिया;
कैसे थामू जिया के तार वे!!....
तू जाने है मेरे मन की बाती;
कैसे कटती है मेरे दिन राती।
बैरन जुदाई सताए मुझे;
नैनों से अश्रु की धारा बहे।।
आने वाले हैं मोरे सांवरिया;
कैैसे थामूूं। जिया केे तार वे,,,,।।  
जरा हौले से....
ओ री सखी आ जा तुझको बताऊं,
मनवां कहे झूमूं, नाचूं, गाऊं।
करने लगी सोलह श्रृंगार मैं;
दर्पण में आज खुद को निहारूंं।।
रूप मेरा ऐसा खिला है; 
बगिया में कोई फूल सा खिला है।
आने वाले हैं मोरे सांवरियााा;
कैैसे थामू जिया के तार वे,,,,,,,,।।
जरा हौले से.....

स्वरचित: मंजू बिष्ट;
गाजियाबाद; उत्तरप्रदेश।