Thursday, 14 May 2020

कविता: उड़न खटोला। 10

उड़न खटोला कहां गए तुम,
निंदिया रानी को लाओ ना।
झूले में लाल सो रहा है,
तुम मीठी नींद सुलाओ ना।।

निंदिया रानी जल्दी से आकर,
आंखों में बस जाओ तुम।
मैं गाऊं मीठी सी लोरी,
मीठी सी नींद बन जाओ तुम।।
उड़न खटोला....

जेठ मास की गर्मी में,
मंद बहार बन जाओ तुम।
ठंडी सी पुरवाई बन कर,
मेरे लाड़ले को सुलाओ तुम।।
उड़न खटोला.....

चंदा मामा सुनो जरा,
मेरे अंगना में आओ ना।
होंठों पे मुस्कान लेके,
मेरे लाल को सुलाओ ना।
उड़न खटोला....

स्वरचित: मंजू बिष्ट; 
गाजियाबाद,
उत्तर प्रदेश।