Friday, 24 April 2020

कविता: मां- 3

मां तू सबसे प्यारी है।
मां तू सबसे न्यारी है।।
ममतामई, करूणामयि।
तेरी सूरत भोली- भाली है।।
सुबह सवेरे लाड़- दुलार से।
जब तू मुझे जगाती है।।
ममता की झप्पी पाते ही।
नींद उड़न छू होती है।।
मां तू......
भरी दोपहरी जेठ की गर्मी।
जब- जब मुझे जलाती है।।
मां तेरे आंचल की छाया।
धूप से मुझे बचाती है।।
मां तू.......
रात में जब तक पढ़ने बैठूं।
तू भी संग- संग जगती है।।
इंतहान देने मैं जाऊं तो।
तू रब के आगे झुकती है।।
मां तू......

स्वरचित: मंजू बिष्ट।
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।