माननीय प्रधानमंत्री महोदय,
प्रधानमन्त्री कार्यालय,
भारत सरकार, भारत।
नई दिल्ली।
दिनांक: १७/०४/२०२०
विषय: कोरोना से देश को बचाने में सशक्त नेतृत्व करने पर अभिवादन पत्र।
माननीय महोदय,
सादर प्रणाम। वर्तमान समय में कोरोनावायरस के संक्रमण ने समस्त विश्व को अपने गिरफ्त में लिया हुआ है। विश्व के महाशक्तिशाली देशों में यह महामारी मौत का कहर बनकर टूट रही है। भारत में कोरोनावायरस के दस्तक देते ही "जनता कर्फ्यू" और "लाॅकडाउन भाग -१:०; लाॅकडाउन भाग-२-०" जैसे अहम निर्णय लेकर आपने एक सुदृढ़ और कुशल नेतृत्व का परिचय दिया है; इस महामारी से लड़ने में हमारे देश के कर्मवीरों ने अपने- अपने क्षेत्र में एक उत्कृष्ट और सराहनीय योगदान दिया है। यदि हम देश के दुसरे पहलू आर्थिक परिस्थितियों को देखते हैं तो यह सत्य है कि लाॅकडाउन से देश की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है; वर्तमान समय में सबसे दयनीय स्थिति निर्धन और असहाय वर्ग की है। पर आपने इन कठिन परिस्थिति में भी निर्धन और असहाय वर्ग के लिए कई योजनाएं शुरू कर दी हैं; जो बेहद सराहनीय हैं; और साथ ही कई समाजसेवकों ने भी अपना भरपूर योगदान दिया है। और साबित कर दिया कि "हर परिस्थितियों में हम भारतीय एक परिवार की तरह हैं"। वर्तमान समय के हालात नाजुक और मुश्किल भरे जरूर है; लेकिन विदेशों से कहीं बेहतर और बहुत अच्छे हैं। हम साल दो साल में अपने देश की आर्थिक परिस्थितियों को फिर से मजबूत कर सकते हैं लेकिन हम जिस इंसान को एक बार खो देंगें; वह इंसान हमें फिर कभी नहीं मिल सकता है। भारत की स्वतंत्रत नागरिक होने के नाते मैं आपसे यह कहना चाहती हूं; कि वैश्विक महामारी के प्रकोप में आपका हर एक कदम, हर एक फैसला देश के हर नागरिक के हित में है। "क्योंकि जान है तो जहान है"। यह कथन एक कटु सत्य है। आपकी दूरदर्शिता, सूझ-बूझ और आपका हर एक कदम सराहनीय है। और मैं शुक्रिया अदा करती हूं, अपने करुणानिधि का; जिन्होंने इस मुश्किल परिस्थितियों में हमारे देश की बागडोर आपके हाथों में सौंपी है। आपको कोटि-कोटि नमन।
धन्यवाद।
भवदीया
नाम: मंजू बिष्ट।
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।
प्रकाशित।
भारत सरकार, भारत।
नई दिल्ली।
दिनांक: १७/०४/२०२०
विषय: कोरोना से देश को बचाने में सशक्त नेतृत्व करने पर अभिवादन पत्र।
माननीय महोदय,
सादर प्रणाम। वर्तमान समय में कोरोनावायरस के संक्रमण ने समस्त विश्व को अपने गिरफ्त में लिया हुआ है। विश्व के महाशक्तिशाली देशों में यह महामारी मौत का कहर बनकर टूट रही है। भारत में कोरोनावायरस के दस्तक देते ही "जनता कर्फ्यू" और "लाॅकडाउन भाग -१:०; लाॅकडाउन भाग-२-०" जैसे अहम निर्णय लेकर आपने एक सुदृढ़ और कुशल नेतृत्व का परिचय दिया है; इस महामारी से लड़ने में हमारे देश के कर्मवीरों ने अपने- अपने क्षेत्र में एक उत्कृष्ट और सराहनीय योगदान दिया है। यदि हम देश के दुसरे पहलू आर्थिक परिस्थितियों को देखते हैं तो यह सत्य है कि लाॅकडाउन से देश की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है; वर्तमान समय में सबसे दयनीय स्थिति निर्धन और असहाय वर्ग की है। पर आपने इन कठिन परिस्थिति में भी निर्धन और असहाय वर्ग के लिए कई योजनाएं शुरू कर दी हैं; जो बेहद सराहनीय हैं; और साथ ही कई समाजसेवकों ने भी अपना भरपूर योगदान दिया है। और साबित कर दिया कि "हर परिस्थितियों में हम भारतीय एक परिवार की तरह हैं"। वर्तमान समय के हालात नाजुक और मुश्किल भरे जरूर है; लेकिन विदेशों से कहीं बेहतर और बहुत अच्छे हैं। हम साल दो साल में अपने देश की आर्थिक परिस्थितियों को फिर से मजबूत कर सकते हैं लेकिन हम जिस इंसान को एक बार खो देंगें; वह इंसान हमें फिर कभी नहीं मिल सकता है। भारत की स्वतंत्रत नागरिक होने के नाते मैं आपसे यह कहना चाहती हूं; कि वैश्विक महामारी के प्रकोप में आपका हर एक कदम, हर एक फैसला देश के हर नागरिक के हित में है। "क्योंकि जान है तो जहान है"। यह कथन एक कटु सत्य है। आपकी दूरदर्शिता, सूझ-बूझ और आपका हर एक कदम सराहनीय है। और मैं शुक्रिया अदा करती हूं, अपने करुणानिधि का; जिन्होंने इस मुश्किल परिस्थितियों में हमारे देश की बागडोर आपके हाथों में सौंपी है। आपको कोटि-कोटि नमन।
धन्यवाद।
भवदीया
नाम: मंजू बिष्ट।
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।
प्रकाशित।