क्रूर कोरोना वाइरस ने;
मचाया हाहाकार है।
सारे जहां के जन-जीवन की;।;
रोक दी रफ्तार है।।
बड़ी मुश्किल है, राह कठिन है,
हम भी हार नहीं मानेंगे।
एकता, संयम, शक्ति से;
देश से तुझे निकालेंगे।।
तू हारेगा, तू भागेगा;
यह संकल्प हम ले चुके हैं।
भारत को अलविदा कहेगा;
यह प्रण अब हम ले चुके हैं।।
सब ने मिलकर ध्येय बनाया;
जन-जन को जगाना है।
आंख, नाक और मुंह को हमने;
बार-बार नहीं छूना है।।
अगर होए खांसी ज़ुकाम,
ना हमको डरना है।
अदरक, तुलसी, गिलोय के;
काढ़े का सेवन करना है।।
रगड़-रगड़ अपने हाथों को
पल- पल हमने धोना है।
बनाकर दूरी जन-जन से;
स्वयं को सुरक्षित रखना है।।
लक्षण दिखे कोरोना के;
न हमको घबराना है।
स्वास्थ्य सेवा की टीम बुलाकर;
अपनी जांच करानी है।।
स्वयं रहेंगे सुरक्षित;
और देश को सुरक्षित रखेंगे।
देश का सच्चा नागरिक बनकर;
हम अपना फ़र्ज़ निभायेंगे।।
"संकल्प" लेते हैं आओ मिलकर;
जन-जन तक जगाना है।
"जनता कर्फ्यू" का सभी को;
संयम से पालन करना है।।
स्वरचित मंजू बोहरा बिष्ट।
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश।