दिसम्बर 2019 वुहान शहर में,
जन्म लिया एक वाइरस ने
सूक्ष्म, अदृश्य था वो इतना;
कोरोना नाम दिया साइंटिस्टों ने
नफरत भरी थी उसमें इतनी;
जाने क्या वह ठानकर आया।
मानव को हथियार बनाकर;
वुहान शहर को तबाह कर डाला।।
अपना-पराया सबको रौंदा;
हर मानव को निगल गया।
पांव पसारे, जड़ें फैलाई;
सारे विश्व में फैल गया।।
लाखों मानव लिए गिरफ्त में;
महामारी बन हाहाकार किया।
देख धरा की ऐसी हालत;
ऊपर वाला भी रो पड़ा।।
भारत पर दस्तक देते ही;
मोदी जी ने नेतृत्व संभाला।
सूझबूझ और संकल्प शक्ति से;
कोरोना से लड़ने का मंत्र बताया।
जनता कर्फ्यू और लाॅकडाउन को;
एक सशक्त हथियार बनाया।।
सामाजिक दूरी और स्वच्छता से;
कोरोना पर जीत का सार बताया।
कर्मवीरों की फौज को बनाकर;
कोरोना पर संहार किया।।
अद्भुत, अदम्य, सुदृढ़ नेतृत्व को;
सारे जहां ने खूब सराहा।
लाॅकडाउन में है विश्व सारा;
कोरोना हराने का हमने संकल्प लिया।।
सूक्ष्म, अदृश्य था वो इतना;
कोरोना नाम दिया साइंटिस्टों ने
नफरत भरी थी उसमें इतनी;
जाने क्या वह ठानकर आया।
मानव को हथियार बनाकर;
वुहान शहर को तबाह कर डाला।।
अपना-पराया सबको रौंदा;
हर मानव को निगल गया।
पांव पसारे, जड़ें फैलाई;
सारे विश्व में फैल गया।।
लाखों मानव लिए गिरफ्त में;
महामारी बन हाहाकार किया।
देख धरा की ऐसी हालत;
ऊपर वाला भी रो पड़ा।।
भारत पर दस्तक देते ही;
मोदी जी ने नेतृत्व संभाला।
सूझबूझ और संकल्प शक्ति से;
कोरोना से लड़ने का मंत्र बताया।
जनता कर्फ्यू और लाॅकडाउन को;
एक सशक्त हथियार बनाया।।
सामाजिक दूरी और स्वच्छता से;
कोरोना पर जीत का सार बताया।
कर्मवीरों की फौज को बनाकर;
कोरोना पर संहार किया।।
अद्भुत, अदम्य, सुदृढ़ नेतृत्व को;
सारे जहां ने खूब सराहा।
लाॅकडाउन में है विश्व सारा;
कोरोना हराने का हमने संकल्प लिया।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट; गाजियाबाद।
उत्तर प्रदेश।