मयूरी कीआंखों से झर- झर आंसू बह रहे थे। उसका भी मन कर रहा था वह भी इन पक्षियों की तरह खुले आसमान में अपने पंखों को फैलाकर उड़े।,,,,लाख कोशिशों के बावजूद भी वह पिंजरे से बाहर नहीं निकल पा रही थी। वह मायूस होकर अपनी कातर भरी नजरों से खुले आसमान को ताके जा रही थी।,,,,, वह सोच रही थी काश! उसके पास ये खूबसूरत पंख ना होते, तो शायद वह इतनी अभिमानी ना होती। आज उसका परिवार, उसके दोस्त उसके पास होते।,,,, सभी लोग उस पर जान छिड़कते थे ।,,,, पर वह हमेशा अपने ही अंहकार में डूबी सबसे अलग-थलग रहती थी,,,,,,अपनी इसी नादानी की वजह से आज वह शिकारी के जाल में फंस गई।,,,,,,,
मयूरी एक बेहद खूबसूरत पंख वाली सुंदर सी चिड़िया थी। जंगल में एक विशाल वृक्ष पर वह अपने माता-पिता और भाई बहनों के साथ रहती थी। उस वृक्ष में बहुत सारे प्रजाति के पक्षी अपने- अपने घोंसलों में रहते थे और कुछ वृक्ष की डालियों में। बाज़ उन सभी पक्षियों का सरदार था, उसका नाम पाशा था। अलग-अलग प्रजाति होने के बावजूद भी सभी पक्षियों में बहुत प्रेम था।,,,,,,
एक दिन शिकारी जंगल में शिकार करने आया। अचानक उसकी नजर मयूरी पर पड़ गई, मयूरी के पंख उसको अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। और खड़ा होकर मयूरी को निहारने लगा। उसके मन में विचार आया,,, "क्यों ना मैं इस खूबसूरत चिड़िया को पकड़ कर राजा को भेंट कर दूं" । इस खूबसूरत चिड़िया को देखकर राजा अवश्य प्रशन्न होंगे, और मुझे ईनाम देंगे"।,,,,, बहुत देर तक सोचने-विचारने के बाद वह आगे बढ़ गया।,,,
दूसरे दिन वह शिकारी जाल लेकर आया। उसने पेड़ के नीचे जाल बिछाया और उसके ऊपर दाने बिखेर दिये।,,,,,
पक्षियों का झुंड आसमान में उड़ने का आनन्द ले रहा था, मयूरी उन सबसे अलग-थलग पेड़ की डालियों में फुदक रही थी। अचानक उसकी नज़र नीचे बिखरे हुए दानों पर पड़ी, इतना सारा दाना देखकर वह बेहद खुश हुईं, और इतराती हुईं उड़कर आई, और दाना चुगने बैठ गई,,,, बैठते ही वह शिकारी के जाल में फंस गई।,,, मयूरी ने देखा उसके दोनों पैर जाल में फंस गए हैं। उसने वह खुद को छुड़ाने का भरसक प्रयास किया। लेकिन स्वयं को असहाय पाकर चीं, चीं, चीं, कर रोने लगी, उसकी आवाज सुनकर सारे पक्षी इकट्ठा हो गए। और वो सब मयूरी को छुड़ाने की कोशिश करने लगे। मयूरी को जाल में फंसा हुआ देखकर दौड़ता हुआ शिकारी आया, उसने मयूरी को पकड़ा और पिंजरे में डाल दिया। और खुशी से झूमते हुए आगे बढ़ गया। सभी चिड़ियां समझ चुकी थी मयूरी की जान ख़तरे में है। सभी चिडियों ने मिलकर शिकारी पर हमला बोल दिया। लेकिन शिकारी जान बचाकर वहां से निकलने में कामयाब हो गया।,,,,,,
शिकारी मयूरी को लेकर राजा के दरबार में पहुंचा। मयूरी के पंखों ने राजा का मन भी मोह लिया, कितनी खूबसूरत चिड़िया है, राजकुमार इस चिड़िया को देखकर बहुत खुश होंगे यह सोचकर राजा ने ख़ुश होकर शिकारी को अपने गले की मोतियों की माला दे दी। राजा ने मयूरी के लिए सुंदर सी सोने का पिंजरा बनवाया, और उस पिंजरे में मयूरी को रखकर अपने बेटे को भेंट कर दिया। राजकुमार मयूरी को देखकर बहुत खुश हुआ। वह उसे विभिन्न प्रकार के दाना-पानी और फल मेवा खिलाता, अपने बाग़ की सैर कराता। महल के ठाट- बाट में मयूरी का बिल्कुल भी मन नहीं लगता था। वह पल- पल अपने भाई बहनों और मित्रों को याद करती रहती थी, और हमेशा उदास बैठी रहती थी। ,,,,,,,
यही हाल जंगल में उस वृक्ष पर रहने वाले सभी पक्षियों का था। मयूरी की याद में सभी पक्षी उदास हो गये। अंत में सभी पक्षियों ने मिलकर मयूरी को खोजने का निर्णय लिया। सभी पक्षी गांव- गांव, शहर- शहर और गली-गली मयूरी को ढूंढने लगे। इसी तरह एक महीना बीत गया। काफी कोशिशों के बाद पाशा ने मयूरी को खोज लिया। उसने सभी पक्षियों को इकट्ठा किया। और राजमहल में मयूरी को देखने की खुशखबरी दी। मयूरी सही सलामत है यह जानकार सभी पक्षी बहुत खुश हुए।,,,,,
अब मुश्किल काम यह था कि राजमहल में जाकर मयूरी को कौन आजाद करे। सभी जानते थे, जो भी राजा के किले से मयूरी को लेकर आयेगा, सैनिक देखते ही उसे गोली मार देंगे।,,,, अंत में पाशा ने यह जिम्मेदारी ली। अपनी सूझबूझ से उसने मयूरी को आजाद करने निश्चिय किया और वह राजा के बाग़ में जाकर बैठ गया। उसने कई दिनों तक पूरे राजमहल में नजर रखी। और एक दिन पाशा ने देखा सांझ में राजकुमार अपने राजमहल में दास- दासियों के साथ टहल रहे थे, पाशा ने देखा एक दासी के हाथ में वही सोने का पिंजरा था। राजकुमार पिंजरे में मयूरी के साथ खेल रहे थे। पाशा ने देखा यही सही मौका है, पाशा उड़कर आया उसने झपट्टा मारा, और पिंजरे को चोंच से पकड़कर उड़ गया। सैनिकों के पकड़ो- पकड़ो चिल्लाने तक बाज़ ऊंचे आसमान में जा चुका था। और अंधेरे की वजह से दिखाई नहीं दिया। बाज़ ज्यों ही ऊंचे आसमान में पहुंचा पिंजरे का दरवाजा खुला और मयूरी पिंजरे से बाहर निकल गई। बाज़ ने मुंह से पिंजरा छोड़ा और झट से मयूरी को अपने पंजे से जकड़ लिया और एक लम्बी उड़ान भरी और दूर जंगल में उसी पेड़ की डाल में आ बैठा। मयूरी कुछ समझ नहीं पायी, उसने दहसत से अपनी आंखें बंद कर ली। अपनी मां की आवाज़ सुनकर उसने जब अपनी आंख खोलकर देखा, उसके माता-पिता, भाई-बहन और सभी दोस्त उसके सामने थे, उसे जैसे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। उसके माता-पिता और भाई- बहन उससे लिपट गए।,,,,,
मयूरी आज कई दिनों बाद अपनों के पास थी, और बेहद खुश थी। उसने पाशा को धन्यवाद दिया। उसे आज भलि-भांति एहसास हो चुका था कि जो खुशी अपनों के बीच में है। वह खुशी दुनिया के किसी कोने में नहीं है।
स्वरचित: मंजू बोहरा बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।