7 मार्च 2000 को उत्तराखंड की धरती पर, हमारा गठबंधन हो गया।
प्रेम और विश्वास भरे धागों से, जीवन का नया आंगन सज गया।।
पतिदेव, दुख- सुख की हर डगर पर, हमने हाथ थामकर चलना सीखा।
धैर्य, विश्वास और अपनापन से, जीवन को समझना सीखा।।
जब दुख के बादल गहराए, मन थोड़ा घबराया भी था।
पर आपने बेहद स्नेह से मुझे, गृहस्थ जीवन समझाया था।।
आज हमारे जीवन में, सबसे प्यारी खुशी हमारा बेटा है।
उसकी मुस्कान से घर- आंगन का, हर कोना प्रेम से महकता है।।
पतिदेव, मेरे शब्दों की उड़ान में, आपका स्नेह भरा आकाश मिलता है।
मेरे सपनों का हर दीप, आपके प्रेम से ही जलता- खिलता है।।
जो भी मैं लिख पाती हूं, वह आपका आशीष ही तो होता है।
मेरे हर संकल्प में आपका साथ, जीवन का सच्चा मोती होता है।।
आपको सालगिरह की, हार्दिक मंगलकामनाएं बार- बार।
ईश्वर करे हमारे जीवन में बना रहे, सदा प्रेम, शांति और प्यार।।
धन की चमक जीवन में, भले ही बहुत अधिक न आ पाए।
पतिदेव, प्रेम, सुख और संतोष से, हमारा छोटा संसार भर जाए।।
स्वरचित: मंजू बोहरा बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।