Thursday, 19 March 2026

मां दुर्गा के नौ रूप नारी का स्वरूप।42

 हिंदू नववर्ष की पहली सुबह, नव आशा का प्रकाश।

मां दुर्गा के चरणों में झुका, हर मन का विश्वास।।


नवरात्रि का स्वागत, शक्ति का संचार।

हर मन हो जागृत, हर सपना हो साकार।।


शंख- घंटों की गूंज में, आस्था का आह्वान।

हर घर- मंदिरों में हो रहा, शक्ति का पावन गान।।


नारी स्वयं है शक्ति, नारी में स्नेह अपार।

मां दुर्गा का स्वरूप, यही जगत का आधार।।


शैलपुत्री सी अडिग है, हर नारी की पहचान।

संघर्षों की राह में, रखती अटल सम्मान।।


ब्रह्मचारिणी सा तप है, उसके हर विचार में।

अपने सपनों को सींचती वह, अपनों के सत्कार में।।


चंद्रघंटा सी निर्भीक, जब अन्याय से लड़े।

अपनी ही शक्ति से, हर भय को दूर करे।।


कूष्मांडा सी सृजन करे, जीवन करे उजियार।

अंधियारे को हराकर, रच दे नया संसार।।


स्कंदमाता सी ममता, आंचल में वो सजाए।

संस्कारों के दीप, घर- परिवार में वो जगाए।।


कात्यायनी सी साहसी, अन्याय को हराती।

रूढ़ियों- बेड़ियों से मुक्त होकर, वह आगे बढ़ती जाती।।


कालरात्रि सी प्रचंड, जब विपदा आए पास।

डरकर नहीं झुकती, बन जाती है प्रकाश।।


महागौरी सी कोमल, मन में प्रेम अपार।

सरलता में बसता है, उसका सच्चा संसार।।


सिद्धिदात्री सा वरदान, हर रूप में समाई।

नारी ही तो शक्ति है, जग ने यह सच्चाई पाई।।


नवरात्रि का यह पर्व, केवल पूजा नहीं मानो।

नारी के सम्मान का, यह सजीव रूप है पहचानो।।


हर घर की दीपशिखा, हर आंगन की शान।

नारी से ही सजे, यह सारा हिंदुस्तान।।


भक्ति में है शक्ति, और शक्ति में नारी।

यही सृष्टि का सत्य, यही जग की फुलवारी।।


आओ मिलकर करें, नारी का सदा सम्मान।

हर नारी में दुर्गा बसी है, मन की आंखों से पहचान।।


स्वरचित: मंजू बोहरा बिष्ट 

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।