Friday, 22 January 2021

दोहा: मेरे सांवरे २

  १- ध्यान करूं गोविंद का, लागी उससे प्रीत।

रोम- रोम मेरा कहे, कान्हा मेरा मीत।।


२- बालपन से कृष्ण तुझे, देखा मैंने रोज।

तेरी चाहत बन गई, मेरी छवि का ओज।।


३-जीवन भर मैं करुंगी, कान्हा तुझसे प्यार।

अपना जीवन वार दूं, तुझपे हज़ार बार।।


स्वरचित: मंजू बिष्ट,

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।