१- ध्यान करूं गोविंद का, लागी उससे प्रीत।
रोम- रोम मेरा कहे, कान्हा मेरा मीत।।
२- बालपन से कृष्ण तुझे, देखा मैंने रोज।
तेरी चाहत बन गई, मेरी छवि का ओज।।
३-जीवन भर मैं करुंगी, कान्हा तुझसे प्यार।
अपना जीवन वार दूं, तुझपे हज़ार बार।।
स्वरचित: मंजू बिष्ट,
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।